Motivational Shayari in Hindi | मोटिवेशनल शायरी हिंदी में | Inspirational Shayari in Hindi

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Motivational Shayari in Hindi | मोटिवेशनल शायरी हिंदी में | Inspirational Shayari in Hindi

जो अपनी जिंदगी में कुछ पाना चाहते हैं,
वो समंदर में भी पत्थरों के पुल बना लेते हैं।


रख हौसला वो मंज़र भी आएगा ,
प्यासे के पास चल के समुन्दर भी आएगा।


ज़िन्दगी में हार और जीत तो लगी ही रहती है,
लेकिन हार के जीतने का मजा ही कुछ और आता है।


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सबकुछ मिल जायेगा तो तमन्ना किसकी करोगे,
अधूरी ख्वाहिशें ही तो जीने का मज़ा देती हैं।


अगर पाना है मंज़िल तो अपना रहनुमा खुद बनो,
वो अक्सर भटक जाते हैं जिन्हें सहारा मिल जाता है।


दीया बुझाने की फितरत बदल भी सकती है,
कोई चिराग हवा पे दवाब तो डाले।


सोचने से कहाँ मिलते हैं तमन्नाओं के शहर,
चलना भी जरुरी है मंजिल को पाने के लिए।


हौसले भी किसी हकीम से कम नहीं होते,
हर तकलीफ़ में ताकत की दवा देते हैं।


यही सोच कर हर तपिश में जलता आया हूँ,
धूप कितनी भी तेज हो समंदर नहीं सूखा करते।


हर मील के पत्थर पर लिख दो यह इबारत,
मंज़िल नहीं मिलती नाकाम इरादों से।


बिना संघर्ष कोई महान नही होता,
बिना कुछ किये जय जय कार नही होता।


सबब तलाश करो अपने हार जाने का,
किसी की जीत पर रोने से कुछ नहीं होगा।


दुआ करो कि सलामत रहे मेरी हिम्मत,
यह एक चिराग कई आँधियों पे भारी है।


एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा,
आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा।


न हमसफ़र न किसी हम नशीं से निकलेगा,
हमारे पाँव का काँटा है हमीं से निकलेगा।


कहती है ये दुनिया बस अब हार मान जा,
उम्मीद पुकारती है बस एक बार और सही।


कामयाब हर इंसान बन सकता है,
बस कोई चोट खाकर बिखर जाता है,
तो कोई चोट सहकर निखर जाता है।


मंज़िल मिलेगी, भटक कर ही सही,
गुमराह तो वो हैं, जो घर से निकले ही नहीं।


हजारों उलझनें राहों में और कोशिशें बेहिसाब,
इसी का नाम है ज़िन्दगी चलते रहिये जनाब।


जो अपने आप को पढ़ सकता है,
वो दुनिया में कुछ भी सीख सकता है।


जब तक नहीं पड़ती हथोड़े की चोट,
तब तक कोई पत्थर भी लोगों के लिए भगवान नही होता।


ना थके हैं कभी पैर,
ना कभी हिम्मत हारी है,
जज्बा है कुछ बनने का ज़िंदगी में,
इसलिये सफर जारी है।


कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन,
फिर इसके बाद थोड़ा सा मुक़द्दर तलाश कर।


अपने हौसले बुलंद कर मंज़िल तेरे बहुत करीब है
बस आगे बड़ता जा, यह मंज़िल ही तेरा नसीब है।


मंजिलें मिले न मिले, ये तो मुकद्दर की बात है,
हम कोशिश ही न करे ये तो गलत बात है।


अपने हौसलों पर जो ऐतबार करते हैं उन्हें,
मंज़िलें खुद पते बताती हैं रास्ते इंतज़ार करते हैं।


जिन के होठों पे हँसी, पाँव में छाले होंगे,
वही लोग अपनी मंज़िल को पाने वाले होंगे।


कभी टूटते है तो कभी बिखरते हैं,
विपत्तियों से ही इन्सान ज्यादा निखरते हैं।


अगर मेहनत आदत बन जाती है,
तो सफलता मुक़द्दर बन जाती है।


मंजिल मिलेगी भटक कर ही सही
गुमराह तो वो है जो घर से निकले ही नहीं।


ना संघर्ष ना तकलीफ तो क्या मजा जीने मे,
तूफान भी थम जाते है जब आग लगी हो सीने मे।


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