गुलज़ार शायरी | Best Gulzar Shayari in Hindi

गुलज़ार शायरी | Gulzar Shayari in Hindi :

नमस्कार दोस्तों, यहां हम आपके लिऐ Hindi Web Quotes वेबसाईट पर हिंदी में गुलज़ार शायरी, Gulzar Shayari in Hindi का बड़ा संग्रह लेकर आए हैं। आप अपनी पसंद के अनुसार सभी प्रकार की शायरी चुन सकते है और जहां पर आप अपने दोस्तों को चांहे जितना शेयर कर सकते है।

 

गुलज़ार शायरी | Gulzar Shayari in Hindi

मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता हूँ
मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती है।


आज मैंने खुद से एक वादा किया है
माफ़ी मांगूंगा तुझसे तुझे रुसवा किया है
हर मोड़ पर रहूँगा मैं तेरे साथ साथ
अनजाने में मैंने तुझको बहुत दर्द दिया है।


तुम्हे जो याद करता हुँ, मै दुनिया भूल जाता हूँ
तेरी चाहत में अक्सर सभँलना भूल जाता हूँ।


बेशूमार मोहब्बत होगी उस बारिश की बूँद को इस ज़मीन से,
यूँ ही नहीं कोई मोहब्बत मे इतना गिर जाता है।


दिल के रिश्ते‍‍‍ हमेशा किस्मत से ही बनते है
वरना मुलाकात तो रोज हजारों से होती है।


कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती हैं
और कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता।


उसने कागज की कई कश्तिया पानी उतारी और
ये कह के बहा दी कि समन्दर में मिलेंगे।


हम अपनों से परखे गए हैं कुछ गैरों की तरह
हर कोई बदलता ही गया हमें शहरों की तरह।


तुमको ग़म के ज़ज़्बातों से उभरेगा कौन,
ग़र हम भी मुक़र गए तो तुम्हें संभालेगा कौन।


हाथ छुटे तो भी रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक़्त की शाख से रिश्ते नहीं तोड़ा करते।


मुझसे तुम बस मोहब्बत कर लिया करो,
नखरे करने में वैसे भी तुम्हारा कोई जवाब नहीं।


रोई है किसी छत पे, अकेले ही में घुटकर,
उतरी जो लबों पर तो वो नमकीन थी बारिश।


खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं
हवा चले न चले दिन पलटते रहते है।


तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं,
रात भी आयी और चाँद भी था, मगर नींद नहीं।


कोई पुछ रहा हैं मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत,
मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना।


एक बार तो यूँ होगा, थोड़ा सा सुकून होगा,
ना दिल में कसक होगी, ना सर में जूनून होगा।


कुछ अलग करना हो तो भीड़ से हट के चलिए,
भीड़ साहस तो देती हैं मगर पहचान छीन लेती हैं।


हम रिश्ते के लिए वक्त नहीं निकाल पाते वह
तुझे वक्त हमारे बीच से रिश्ते ही निकाल देता है।


रो रहे हो तो यह सच्चा प्यार ही नहीं
बल्कि यह आपका उसके प्रति लगाव है
जो आपको तड़पाता है
और आपको किसी और का होने भी ना देता।


कुछ सुनसान पड़ी है ज़िंदगी,
कुछ वीरान हो गए है हम,
जो हमें ठीक से जान भी नहीं पाया,
खामखां उसके लिए परेशान हो गए है हम।


उठाए फिरते थे एहसान जिस्म का जाँ पर
चले जहाँ से तो ये पैरहन उतार चले।


सहर न आई कई बार नींद से जागे
थी रात रात की ये ज़िंदगी गुज़ार चले।


कभी तो चौक के देखे कोई हमारी तरफ़,
किसी की आँखों में हमको भी को इंतजार दिखे।


एक बार तो यूँ होगा, थोड़ा सा सुकून होगा
ना दिल में कसक होगी, ना सर में जूनून होगा।


अगर किसी से मोहब्बत बेहिसाब हो जाए¸
तो समझ जाना वह किस्मत में नही।


उम्र जाया कर दी लोगो ने औरों में नुक्स निकालते निकालते
इतना खुद को तराशा होता तो फरिश्ते बन जाते।


Follow us On : Facebook | Instagram | Twitter | Telegram

Share via
Copy link
Powered by Social Snap